
किसानों को अब तक 87 करोड़ का किया जा चुका है भुगतान
राजस्थान सरकार प्रदेश में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। इस दिशा में वसुंधरा सरकार द्वारा अब तक किए गए कार्य सराहनीय रहे हैं। सरकार ने किसानों के हित में पिछले 3 वर्षों में कई योजनाएं शुरू की है। जिसका राज्य के किसानों को लाभ प्राप्त हो रहा है। हाल ही प्रदेश में कर्ज माफी की मांग को लेकर हुए किसान आंदोलन में किसानों और वसुंधरा सरकार के बीच हुए समझौते के तहत सरकार ने विशेषज्ञ कमेटी गठित कर दी जो किसानों के 50 हजार तक के कर्ज माफी पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इससे पहले राजस्थान सरकार ने किसानों की सभी 13 सूत्रीय मांगे मान ली है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का लक्ष्य प्रदेश के किसानों को साथ लेकर विकास की राह पर आगे बढ़ना है।
प्रदेश में अब तक 126 करोड़ से अधिक के समर्थन मूल्य पर हुई खरीद
राजस्थान में किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन की तीव्र गति से खरीद कर रही है। प्रदेश में अब तक 126 करोड़ 74 लाख रुपए से अधिक समर्थन मूल्य पर खरीद हो चुकी है। खरीद के साथ ही सरकार किसानों को त्वरित भुगतान कर रही है। रजिस्ट्रार एवं प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता अभय कुमार के अनुसार अब तक किसानों के खातों में 87 करोड़ रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर भी की जा चुकी है।
करीब 11 हजार किसानों को किया जा चुका है भुगतान
सरकार ने प्रदेश के किसानों से 667.50 करोड़ रुपए की मूंगफली, 836.25 करोड़ रुपए के मूंग, 457.50 करोड़ रुपए की सोयाबीन एवं 162 करोड़ रुपए के उड़द की उपज खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार राजस्थान में कुल 2 हजार 123 करोड़ 25 लाख रुपए मूल्य के दलहन एवं तिलहन की खरीद की जाएगी। राज्य में अब तक 15 हजार 79 किसानों से समर्थन मूल्य पर 126 करोड़ 74 लाख रुपए मूल्य की सोयाबीन, मूंगफली, मूंग एवं उड़द की खरीद की जा चुकी है। साथ ही अब तक 10 हजार 804 किसानों को 87 करोड़ 33 लाख रुपए का भुगतान बैंक खातों में किया जा चुका है। खास बात यह है कि कृषि उपज की राशि को किसान परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है।
Read More: http://rajasthantruths.com/mann-ki-baat/
जिला कलेक्टरों को मिले ये निर्देश
संबंधित जिला कलक्टरों को जिले के खरीद केन्द्रों का दौरा कर व्यस्थाओं को बनाए रखने एवं किसानों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। झालावाड़ जिला कलक्टर द्वारा कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग के जरिए जिले के खरीद केन्द्रों पर किसानों से संपर्क कर कृषि उपज को नैफेड के मानदंडों के अनुसार तैयार कर लाने को कहा गया था जिसके कारण झालावाड़ में कृषि उपज का रिजेक्शन न के बराबर रहा है।
करीब सवा लाख किसानों ने कराया आॅनलाइन पंजीयन
सोयाबीन, मूंगफली, मूंग एवं उड़द की उपजों के लिए 1 लाख 22 हजार 566 किसानों द्वारा आॅनलाइन पंजीयन करवाया गया है। 75 हजार से अधिक पंजीयनकर्ता किसानों को उनकी उपज की तुलाई के लिए दिनांकों को आवंटन भी कर दिया गया है। बाकी के किसानों को भी जल्द तुलाई के लिए दिनांक आवंटन कर दी जाएगी।
साथ ही किसानों को उनकी उपज के रिजेक्शन के संबंध में ऑनलाईन सूचना देने के लिए व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। इससे खरीद प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता स्थापित होगी तथा किसान को उपज में एफएक्यू मापदण्डों के अनुसार रही कमी के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
कांग्रेस सरकार के मुकाबले आधी से कम दर पर मिलगा लोन
प्रदेश के किसानों को कृषि कार्य के लिए कांग्रेस के शासन में 12% ब्याज दर पर ऋण मिलता था जबकि वर्तमान बीजेपी सरकार राज्य में 6.7 प्रतिशत दर पर ऋण दे रही है। इसे जल्द ही घटाकर 5.5 प्रतिशत किया जाएगा। वर्तमान सरकार की किसान कलेवा योजना में कृषि मंडियों में किसानों को 5 रुपए में भोजन दिया जा रहा है। कृषक साथी सहायता योजना मेंं खेती करते समय किसान या खेतीहार मजदूर की मृत्यु हो जाने पर पहले 1 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती थी, उसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है। साथ ही किसानों के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना का लाभ 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दिया गया है। यानि वर्तमान सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार के मुकाबले किसानों के दुर्घटना बीमा में 12 गुना वृद्धि की है। सरकार इसे आगे बढ़ाकर 10 लाख रुपए करेगी।
पिछले तीन वर्षों में किसानों को दिया 57 हजार करोड़ का ब्याज मुक्त फसली ऋण: वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली वर्तमान राजस्थान सरकार ने 3 साल में किसानों को बिना ब्याज करीब 57 हजार करोड़ रुपये का फसली ऋण दिया है। वहीं इससे पहले की कांग्रेस सरकार ने अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में 25 हजार करोड़ का ही ऋण दिया था। अकेले अजमेर संसदीय क्षेत्र में अब तक 2065 करोड़ रुपए से अधिक का सहकारी फसली ऋण दिया जा चुका है। आगामी साल यानि वर्ष 2018 तक राजस्थान में ब्याज मुक्त फसली ऋण का आंकड़ा 75 हजार करोड़ रुपए के पार हो जाएगा।

