बहुत मायने रखती है सीएम वसुंधरा राजे की टिप्पणी। घमंड दूर होना चाहिए सत्ता के नशे में डूबे भाजपा नेताओं का।

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3 Years of suraaj

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 27 नवम्बर को जल स्वावलम्बन अभियान की कार्यशाला में भाजपा के जनप्रतिनिधियों की गैर मौजूदगी पर नाराजगी प्रकट की। सीएम राजे का कहना रहा कि ऐसे जन प्रतिनिधियों को क्या दोबारा से सांसद, विधायक और मंत्री नहीं बनना है। राजे ने जो टिप्पणी की इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान मेें भाजपा के नेता किस कदर सत्ता के नशे में डूबकर घंमडी बने हुए हैं। जब सीएम की कार्यशाला की अनदेखी की जा रही है तो जिला स्तर पर होने वाली सरकारी बैठकों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सब जानते हैं कि जिला परिषद की जब साधारण सभा होती है तो जिले के सांसद तो अधिकांश तौर पर गैर हाजिर रहते ही हंै साथ ही विधायक भी गिने-चुने ही आते हैं। इसी प्रकार जिला स्तरीय बैठकों में भी सांसद विधायक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाते। असल में सत्ता का सुख भोग रहे भाजपा के अधिकांश जनप्रतिनिधि घमण्डी और लापरवाह हो गए हंै। सरकारी साधनों का दुरुपयोग ऐसे किया जाता है जैसे इनके पिताजी अथवा दादाजी विरासत में दे गए हैं। जबकि जिस जनता के वोट से विधायक, सांसद, मंत्री आदि बने है उस जनता की कोई सुध नहीं ली जाती। जिन विधायकों और भाजपा नेताओं को लालबत्ती वाला वाहन मिल गया है उनका हाल तो और भी बुरा है। परिवार के सदस्य लालबत्ती के सरकारी वाहन में टेढ़े-मेढ़े होकर ऐसे बैठते हैं जैसे अपने पिता के पैसे से वाहन को खरीदा हो। सीएम वसुंधरा राजे माने या नहीं, भाजपा के नेता जिस प्रकार घमंडतापूर्ण व्यवहार कर रहे हैं उससे आम मतदाता बेहद गुस्से में है। यह माना कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी जैसे क्रांतिकारी फैसलों से लोग खुश हैं, लेकिन जनता के इस समर्थन पर भाजपा के घमंडी नेता पानी फेर रहे हंै। यदि भाजपा के नेताओं ने मतदाताओं के बीच सादगीपूर्ण व्यवहार नहीं किया तो प्रधानमंत्री के क्रांतिकारी फैसले भी चुनाव में धरे रह जाएंगे। अभी भी समय है अब अपना घमंड छोड़कर भाजपा के जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर शालीनता के साथ पेश आएं।

(एस.पी.मित्तल)

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