
लोकसेवकों पर न हो झूठे केस दर्ज, इसलिए राजस्थान सरकार ला रही है नया कानून
राजस्थान सरकार ने लोकसवकों को झूठे केसों से बचाने के लिए एक नया बिल लाने की तैयारी कर ली है। इस बिल के तहत लोकसवकों के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इस बिल के दायरें में जज, मजिस्ट्रेट, सरकारी अफसर, विधायक, नेता, पंच—सरपंच और अन्य गजिटेड आॅफिसर आदि आएंगे। यानि कहने का मतलब है कि बिना सरकार की अनुमति के लोकसेवकों खिलाफ न तो पुलिस कोई एफआईआर दर्ज कर सकेगी और न ही इस्तीगासे के जरिए कोई कार्रवाई हो सकेगी। राजस्थान सरकार यह बिल केवल इसलिए ला रही है ताकि सरकारी अधिकारियों और नेताओं पर झूठे केस दर्ज न हों और न ही उनकी साफ छवि को धुमिल किया जा सके। साथ ही किसी भी लोकसेवक का नाम सोशल प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्विटर या व्हाटसअप आदि पर डाला तो 2 साल की कैद भी हो सकती है। हालांकि कांग्रेस सहित अन्य पाटिर्यों ने इस अध्यादेश के खिलाफ विरोध जताया है। एक मत में सभी का पक्ष है कि यह फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है और इस फैसले के बाद आम आदमी की सुनवाई को दायरे में बांध दिया जाएगा। rajasthan government ordinance
2.76 लाख केस में से 1.76 लाख केस बेबुनियादी
अधिकांश यह देखा गया है कि अधिकतर नेताओं और ऊंची रसूख वाले अधिकारियों को केवल ब्लैकमेल करने या फायदा लेने के लिए झूठे केसों में फंसाया जाता है। लेकिन अब से यह नहीं होगा। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ सालों में इस्तगासे के जरिए लोकसेवकों के खिलाफ 2.70 लाख केस दर्ज हुए हैं। यह संख्या बहुत ज्यादा है लेकिन सच तो यह है कि इनमें से 1.76 लाख केस झूठे पाए गए। हालांकि जो दोषी करार दिए गए हैं उनकी संख्या भी कम नहीं है, लेकिन वसुंधरा सरकार बाकी बचे करीब एक लाख निर्दोष लोकसेवकों को बचाना चाहती है। rajasthan government ordinance
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राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति पर कायम
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति पर कायम रहते हुए राजस्थान सरकार ने कहीं भी भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण देने की बात नहीं कही है। सरकार की मंशा केवल इतनी है कि कोई व्यक्ति गलत इस्तेमाल कर ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ लोकसेवक की छवि खराब न कर सके। अभी इस अध्यादेश को विधानसभा में पे किया जाना शेष है। अगर यह बिल पास होता है तो इसे कानूनी मान्यता मिल जाएगी। इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
क्या होंगे बिल में प्रावधान
— लोकसेवक के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए सरकार से अभियोजन स्वीकृति लेनी होगी। इसी सीमा 180 दिन यानि 6 महीने तय की गई है।
— सरकार दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन कर धारा 228बी जोड़ने के लिए बिल ला रही है।
— सरकार से मंजूरी के बिना पुलिस किसी लोकसेवक के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कर सकेगी।
— कोर्ट इस्तगासे या प्रसंज्ञान से अनुसंधान के आदेश जारी नहीं कर सकेगी।
— अब तक केवल गजेटेड आॅफिसर को ही लोकसेवक माना गया था। इस अध्यादेश में सरकार ने यह दायरा बढ़ा दिया है।
— सरकार से अभियोजन स्वीकृति मिलने से पहले दागी लोकसेवक का नाम व पहचान उजागर करने पर दो साल तक की कैद या सजा का प्रावधान किया गया है। rajasthan government ordinance

