10वीं बोर्ड परीक्षा में छात्रों ने बनाई बढ़त, सरकारी स्कूलों के छात्रों ने भी जमाई अपनी धाक

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    राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं परीक्षा का परिणाम गुरुवार शाम को जारी हुआ। परिणाम 78.96% रहा। लगातार दूसरे साल भी लड़कों ने बाजी मारी। उनका परिणाम 79.01% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 78.89% रहा। गत वर्ष 10वीं का ओवरऑल परिणाम 75.89 प्रतिशत रहा था। इस बार यह 3 प्रतिशत बढ़ कर 78.96% हो गया।

    10 लाख 72 हजार 799 छात्रों ने दी थी परीक्षा

    शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने अजमेर स्थित बोर्ड परिसर में यह परिणाम घोषित किया। शिक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि इस बार 10 लाख 98 हजार 655 परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत थे। इनमें 6 हजार 284 प्राईवेट स्टूडेंट थे, बाकी सभी स्टूडेंट रेगुलर थे। इसमें से 10वीं के एग्जाम में जो स्टूडेंट्स अपीयर हुए उनकी संख्या 10 लाख 72 हजार 799 थे।

    सीकर, नागौर के छात्रों ने महानगरों से मारी बाजी

    रिजल्ट के मामले में सीकर 86.27 प्रतिशत के साथ पहले, नागौर (84.49%) दूसरे तथा झुंझुनूं (84.37%) तीसरे स्थान पर रहा। जयपुर 81.24 फीसदी परिणाम के साथ 9वें स्थान पर रहा। उधर, प्रवेशिका का परिणाम 60.20 प्रतिशत परिणाम रहा। इस परीक्षा में महज 7769 विद्यार्थी शामिल हुए। इसके अलावा वोकेशनल का परीक्षा परिणाम 78.96 प्रतिशत रहा।

    दिनोंदिन बेहतर हुआ है परिणाम

    शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सैकंडरी परीक्षा का परिणाम घोषित करते हुए कहा कि बोर्ड का परीक्षा परिणाम उत्तरोत्तर बेहतर हुआ है। तीन सत्र पूर्व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का परीक्षा परिणाम 57.66 प्रतिशत था जो कि शैक्षणिक सत्र 2016-17 के लिए बढ़कर 78.96 प्रतिशत हो गया। इस प्रकार तीन वर्षों में विद्यार्थियों ने 21.30 प्रतिशत बेहतर परिणाम दिया है।

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    कम समय में जारी किया परिणाम, बोर्ड ने दिखाई अपनी क्षमता

    देवनानी ने कहा कि राजस्थान का शिक्षा बोर्ड देश के सर्वोत्तम बोर्डों में से एक है। बोर्ड द्वारा पारदर्शिता के साथ समय पर परीक्षा परिणाम जारी किए जाते हैं। परीक्षार्थियों की अधिक संख्या के बावजूद देश में सबसे कम समय में परिणाम घोषित करके बोर्ड ने अपनी कार्य क्षमता प्रमाणित की है।

    सरकारी स्कूलों के छात्रों ने दिखाई अपनी योग्यता

    देवनानी ने कहा कि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत इस बार 3.74 प्रतिशत बढ़ा है। इस बार सरकारी स्कूलों से 75.69 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि गत वर्ष सरकारी स्कूलों का परिणाम 71.95 प्रतिशत रहा था। सरकारी स्कूलों से गत वर्ष 77 हजार 218 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए थे, इस बार यह संख्या बढ़ कर 92 हजार 478 हो गई।

    75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थी गत वर्ष 11 हजार 688 थे, जो इस बार बढ़ कर 15 हजार 87 हो गए। इधर प्राइवेट स्कूलों का परिणाम केवल 2.64 प्रतिशत बढ़ा। प्राइवेट स्कूलों का गत वर्ष परिणाम 79.85 प्रतिशत रहा था, जो इस बार बढ़ कर 82.49 प्रतिशत रहा। प्राइवेट स्कूलों से प्रथम श्रेणी लाने वाले विद्यार्थी गत वर्ष 2 लाख 16 हजार 351 थे, जो इस बार बढ़ कर 2 लाख 17 हजार 283 हो गए।

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