
केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने श्रम कानूनों के सरलीकरण की आवश्यकता को बताते हुए कहा कि असके अभाव में अद्योग लगाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजधानी जयपुर में श्रम विभाग के क्षेत्रिय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई देशों के उद्योगपति भारत में उद्योग लगाना चाहते हैं लेकिन यहां के श्रम कानून की जटिलता के कारण पीछे हट जात है। उन्होने कहा कि कानून के सरलीकरण करने से उनकी पालना कराना भी आसान होता है साथ ही सरल कानून होने से ज्यादा से ज्यादा उद्योग लगेंगे और लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
वसुंधरा राजे प्रगतिशील और डायनेमिक मुख्यमंत्री: दत्तात्रेय
केंद्रीय मंत्री दत्तात्रेय ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश में में श्रम सुधार में कई सकारात्मक और श्रेष्ठ कार्य किये जा रहे है। राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रगतिशील तथा डायनेमिक मुख्यमंत्री है जो लगातार प्रदेश में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए नित नई योजानओं और कार्यक्रमों को लागू करती रहती है।
रोजगार सृजन के लिए एक हजार करोड़ आवंटित
श्रम मंत्री ने सम्मेलन में जानकारी देते हुए बताया कि मजदूरों में रोजगार सृजन की अधिक आवश्यकता है जिससे नौकरी की सुरक्षा, वेज सिक्योरिटी और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रोजगार प्रोत्साहन योजना लाई जा रही है जिसमें सरकार द्वारा रोजगार सृजन के लिए एक हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गये गए है।
राजस्थान को मिलेगी 3 ईएसआई अस्पतालों की सौगात
केंद्रीय मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने राजस्थान के लिए तीन ईएसआई अस्पतालों की घोषणा की है। उन्होने कहा कि राजस्थान में मजदूरों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की दृष्टी में इन अस्पतालों की महती आवश्यकता है। अब राजस्थान में उदयपुर, बीकानेर और नीमराणा में ईएसआई के 100-100 बेड वाले तीन अस्पताल खोले जाएंगे। इसके अलावा 25 नई डिस्पेंसरीज को मंजूरी दी गई है। ईएसआईसी की कुछ डिस्पेंसरीज को 6 बेड के हॉस्पिटल में बदला जाएगा, जिससे वहां छोटे स्तर के ऑपरेशन किए जा सकेंगे। इसके साथ ही ईएसआईसी के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाएगा। केंद्र देश भर के 980 रोजगार केंद्रों की जगह नेशनल करियर सेंटर्स स्थापित करेगी। इसके तहत कोटा, भरतपुर और बीकानेर में मॉडल करिअर सेंटर खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय देश में केवल सात प्रतिशत श्रमिक संगठित क्षेत्र की सूची में शामिल है जबकि 93 प्रतिशत श्रमिक अभी भी असंगठित क्षेत्र में काम रहे है। सरकार चाहती है कि असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों को भी संगठित क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों के समान सुविधाए मिले, सरकार इसके लिए काम कर रही है।
कानूनों में बदलाव का नतीजा, निवेश में आई तेजी
उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों और महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कदम उठा रही है, आशा, आंगनबाडी समेत अन्य क्षेत्रों में काम कर रहीं महिलाओं को भी सामाजिक सुरक्षा मिले इसके प्रयास किये जा रहे है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किये गये बदलाव का नतीजा है कि तीन साल में देश में निवेश तेजी से आ रहा है। मजदूरों और गरीबों का उत्थान हुआ है, सामाजिक सुरक्षा बढी है। औद्योगिक विकास का माहौल बना है तथा रोजगार की संभावनाए बढी है।

