राजस्थान के इस लाड़ले ने बना दी ऐसी सड़क जिस पर नही होता, धूल, धूप और बारिश का असर

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Plastic Road

प्लास्टिक वेस्ट आज देश और दुनिया के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्लास्टिक एक ऐसा मेटेरियल है जो कभी खत्म ही नही होता ऐसे में विश्वभर के सामने इसका इस्तेमाल कर निस्तारण करने की समस्या उठ खड़ी हो  गई है। दुनिया भर में वेस्ट प्लास्टिक पॉलीथिन को रिसाईकिल कर इसका बार बार उपयोग किया जा रहा है। अब इसके निस्तारण का नया आइडिया राजस्थान के लाड़ले दुनिया को दिया है। राजस्थान के झुंझुनू के पातुसरी गांव के रहने वाले आईआईटी धनबाद के छात्र गौरव कड़वासरा ने पॉलीथिन के वेस्ट से सड़क निर्माण का विकल्प तैयार कर दुनिया को प्लास्टिक निस्तारण करने का शानदार सूझाव दिया है।

Gorav - Made Plastic Road

झुंझुनू के गौरव ने चास में बनाई प्लास्टिक की सड़क

गौरव व उसके साथी वेस्ट से सड़क बनाने का यह अनूठा प्रयोग धनबाद के चास में कर चुके हैं। प्रयोग के तौर पर फिलहाल आधा किलोमीटर की सड़क बनाई गई है। गौरव मूल रूप से झुंझुनूं के पातुसरी गांव का रहने वाला है तथा सोलाना में ननिहाल है। गौरव के मामा ग्रामसेवक राजेंद्र डूडी ने बताया कि धनबाद के चास नगर निगम क्षेत्र में इस तरह की सड़क बनाई गई है। गौरव का यह नया इनोवेटिव रोड़ कभी खराब होने वाला नही है। उन्होने बताया कि इस विधि से बनी सड़क पर बारिश के पानी का असर नहीं पड़ता। हॉटमिक्स प्लांट में बिटूमन अलकतरा के साथ पॉलीथिन मिलाया जा रहा है। उसके बाद इसे लगभग 100 डिग्री पर गर्म किया जाता है। लागत में 4-6 प्रतिशत की बचत की जा रही है।

झारखंड के जमशेदपुर में बनी थी ऐसी सड़क

गौरव व उसके साथियों ने टोटल वेस्ट सोल्यूशन नामक संस्था के साथ मिलकर चास नगर निगम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम कर रहा है। हर शहर की तरह चास में भी पॉलीथिन वेस्ट का डिस्पोजल करना बड़ी चुनौती है। गौरव ने बताया कि एनएच-32 में एसडीओ ऑफिस तक की सड़क में पॉलीथिन के वेस्ट का प्रयोग किया गया। अभी झारखंड में सिर्फ जमशेदपुर में इस तरह की सड़क बनी है।

plastics road in Rajasthan

बोकारो डीसी ने दिया सहयोग

इस सड़क निर्माण में बोकारो डीसी का भी सहयोग रहा। इस पूरे काम में आईएसएम के स्टार्टअप टोवैसो प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े पांच युवकों की मुख्य भूमिका महत्वपूर्ण रही। इसमें गौरव के अलावा सौरव, सोनी, के हरि व अमित शामिल है।

तीन दिन में बनी सड़क

गौरव ने बताया कि इस सड़क को बनाने में तीन दिन लगे। इस पूरे प्रोजेक्ट में 15 लाख रुपए खर्च आया है। इस प्रोजेक्ट को जब नगर निगम चास को बताया गया था तो उसी समय नगर निगम के कार्यपालक अधिकारी कृष्णकुमार ने अपनी सहमति जाहिर की, लेकिन राशि व अन्य सामान को लेकर परेशानी आ रही थी तो बोकारो डीसी राय महिमापत रे से मिले और उन्होंने भरपूर सहयोग किया। जिसके बाद एनएच 32 से अनुमंडल कार्यालय तक लगभग 450 मीटर लंबी सड़क बनाई गई है।