राजस्थान दिवस: ‘माटी बांधे पैजनी, बंगड़ी पहने बादली’ से गूंजा आकाश, रेतीली धरती से दिखा भविष्य का उजास

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    Rajasthan Day Celebration 2017 in Jaipur: Culure Programme
    Rajasthan Day Celebration 2017 in Jaipur: Culure Programme

    बढ़ रहे हैं छूने को आसमान, आगे बढ़ रहा है हमारा राजस्थान। थीम जो सुनहरे राजस्थान के सपनों की परिकल्पना को रंग भर रही थी। धोरों की धरती के रंग में खुशबू है तो रमणी वादियां भी हैं। इनका अतीत भी है तो भविष्य की उड़ान भी है। प्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा का आवरण सुनहरे राजस्थान की स्थापना की गाथा कुछ इसी तरह कह रहा था। 69वें वर्ष के राजस्थान दिवस समारोह की यह अंतिम शाम थी, जिसमें गुलाबी शहर गुलाबी रोशनी से नहाया हुआ अपने अतीत कें मंजरों को पुनर्जीवित कर रहा था।

    अतिथियों के स्वागत में मुख्यमंत्री राजे ने बिछाए पलक-पावड़े

    जयपुर में राजस्थान दिवस के मौके पर सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ ही लेजर शो का विशेष आकर्षण देखने को मिला। मुख्य समारोह ही राजधानी में भूटान की राजमाता आशी दौरजी वांगमो वांग चुक मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश की शोभा बढ़ा रही थी तो सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने अतीथियों के स्वागत में पलक पावड़े बिछाकर राजस्थान के रंगों से परिचित करवा रही थी।

    एक नज़र राजस्थान दिवस के कार्यक्रमों पर

    आंखों के सामने आकर्षक दिखने वाली रोशनी मंद पड़ी और फिर जो उजास था, उसने मेक इन राजस्थान से लेकर रंगीलो ढोलना तक के गीतों से प्रदेश की व्याख्या कर डाली। इस परंपराओं से सुसज्जित राजस्थान दिवस के कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र बना तकनीकीकरण । जो कभी दर्शकों के बीच तो कभी विशिष्ट मेहमानों के बीच और फिर ज्यादातर समय आकाशीय दीर्घाएं बनाती रही। लेजर शो के जरिए जो दिखाया गया वह अदभुत था।

    हर लम्हे को यादगार बना गई राजस्थान की यह शाम

    दर्शक दीर्घा में बैठे मेहमानों के बीच से शाही लवाजमे के साथ घोड़े और ऊंटों की कतार निकलती हैं। रंग बिरंगी तरंगों के साथ टाइगर दहाड़ मारता हैं और उसके इर्द-गिर्द अन्य वन्यजीव। फिर राजस्थान की वीरगाथा शुरु होती है । सोने सी रेत जैसे आंखों के सामने टीले बनाने लगती है। एक ओर राजस्थानी वाद्य यंत्र अलगोजों की शानदार ध्वनी गूंजने लगती हैं तो दूसरी ओर रावण हत्थे के साथ भोपा-भोपी नाचने में मशगूल हो गये। अगले की क्षण कठपुतलियां आकर अपने केसरिया बालम की शरारतों से सबकों अपनी और आकर्षित करती हैं और कहती हैं कि वो युं ही नही किसी के इशारों पर नाचती हैं, कोई केसरिया बालम मुझे नचाने के लिए मेरे राजस्थान में आए और मुझे रिझाए।

    कभी रेत के धोरों सा तो कभी रंगीली छवी में दिखा हमारी विधानसभा भवन
    अपनी परंपराओं को सहेजने के साथ राजस्थान तकनीकी विशेषता में भी आगे हैं इसका एक नजारा जनपथ पर नजर आया। लेजर शो के जरिए विधानसभा का रंग कभी रेतीला दिखा तो कभी रंगीला। रंग के साथ नूर भी था, जिसमें प्रदेश की सुंदरता का खास अंदाज था। अचानक ऐसे लगा जैसे विधानसभा का यह रंग बदल गया और एक गतिमान चक्र चलने लगा। भवन के गेट से मेट्रो ट्रेन निकली तो सबकी निगाहें खुद के ऊपर जा टिकी। लगा जैसे ट्रेन ऊपर ही आ गई। यह दृश्य भविष्य के राजस्थान का सपना ही था।

    माटी बांधे पैजनी, बंगड़ी पहने बादली‘ से गूंजा आकाश

    शाम गहराती गई और एक आवाज मौजूद लोगों के दिलों में जाकर टीस पैदा कर रही थी। पार्श्व में इला अरुण की आवाज में गुंजता ‘माटी बांधे पैजनी, बंगड़ी पहने बादली’ ने दर्शकों को सराबोर कर दिया। लोग खड़े हुए और तालियां बजाते रहे । एकदम आकाश गूंजने लगा, जयपुर के विश्व प्रसिद्ध शोरगर अपना कमाल आकाश की ऊंचाइयों तक ले गए। जमकर आतिशबाजी हुई और समारोह का समापन भी इसी के साथ हुआ।