जानिए राजस्थान कैसे पिछड़ा शिक्षा के क्षेत्र में

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कांग्रेस ने भारत पर 60 साल राज तो किया लेकिन अपने आराम और अपने वोट बैंक के लिए। जानिए राजस्थान कैसे पिछड़ा शिक्षा के क्षेत्र में –
वर्ष 2013 राजस्थान में चुनावों का वर्ष था और गहलोत जी को सियासत इतनी पसंद थी की उन्होंने बिना किसी सोच के, बिना किसी योजना के और सिर्फ अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में पीछे लाकर खड़ा कर दिया था। मित्रों राज्य में 9177 ग्राम पंचायतों में केवल 3429 उच्च माध्यमिक विद्यालय थे तथा प्राथमिक विद्यालयों में भी 28 हजार ऐसे प्राथमिक विद्यालय संचालित थे जिनमें विद्यार्थियों का नामांकन 30 से भी कम था। मतलब जहा ज़रूरत थी वहाँ विद्यालय नहीं और जहा बच्चे नहीं वहाँ विद्यालय और अद्यापक दोनों ही ज़्यादा संख्या में। कई जगह तो ऐसी भी जहा बच्चे पढ़ने आते वहाँ दो कमरों का विद्यालय और अद्यापकों की कमी। पूरे राजस्थान में शिक्षकों के 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त थे। इन्ही वजहों के कारण राजस्थान पूरे देश में शैक्षिक दृष्टि से अत्यधिक पिछड़ गया तथा बीमारू राज्यों की श्रेणी में आ गया था।
इसकी कमी को दूर करने के लिए वसुंधरा सरकार ने पूरा plan बनाया और तरीके से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठाये-
13766 उच्च प्राथमिक/प्राथमिक विद्यालयों को उनके नजदीक स्थित 11696 माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मर्ज किया गया। जिससे एक ही विद्यालय से बच्चे अपनी 12 वीं तक की शिक्षा पूर्ण कर सकते हैं। मतलब अब बार बार विद्यालय change नहीं करना पड़ेगा और बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएँ प्राप्त होगी। विद्यालयों को मर्ज करने से अब प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक आदर्श विद्यालय तो है ही जिसमें पढ़ाई के साथ खेल कूद, Computer Room, Art and Craft Room, पुस्तकालय, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं पेयजल सुविधाओं भी उपलब्ध हैं।
अगर कोई योजना तरीके से लागु होगी है तो उसका परिणाम भी बेहद शानदार आता है 2014 में 34 लाख बच्चों का नामांकन था जो अब 2016 में बढ़कर 43 लाख हो गया है मतलब बच्चों के नामांकन में पिछले 2 वर्षों में 11.00 लाख की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी 2013 के मुकाबले 2016 में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 56 से बढ़कर 70 प्रतिशत हुई है। कक्षा 12 वीं के कला वर्ग का परीक्षा परिणाम निजी विद्यालयों से भी श्रेष्ठ (88प्रतिशत) रहा है। स्कूलों में अध्यापकों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के प्रयासों से अब तक 36 हजार अध्यापकों को नियुक्ति दे दी हैं। 13 हजार 98 Lecturers की परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है और अक्टूबर तक ये Lecturers उपलब्ध हो जाएंगे। इसके साथ ही करीब 23 हजार तृतीय श्रेणी अध्यापकों, 6 हजार 468 वरिष्ठ अध्यापकों तथा करीब 2278 पुस्तकालय अध्यक्ष एवं Lab Assistant की भर्ती प्रक्रिया में है।
अब वह दिन दूर नहीं मित्रों जब राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर होगा।