
20 दिन से चल रहा आनंदपाल मामला अब शांत नजर आ रहा है। गुरूवार शाम गैंगस्टर आनंदपाल के अंतिम संस्कार के साथ ही राज्य सरकार और मृतक आनंदपाल के परिवार में चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। जानकारी के अनुसार मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद परिवार की सहमति से मृतक गैंगस्टर आनंदपाल की 20 दिन बाद अंत्येष्टी की गई है। आनंदपाल का अंतिम संस्कार के दौरान मृत्तात्मा को मामा अमर सिंह के पुत्र ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान बुधवार रात से लगे कर्फ्यु में दो घंटों की ढील दी गई। आपकों बतादें कि आनंदपाल को श्रद्धांजली देने के नाम पर राजपूत समाज ने सांवराद गांव में उपद्रव मचाया जिसमें करीब 25 पुलिस कर्मी घायल हो गए। एक व्यक्ति की मौत हो गई और करीब 10 पुलिसकर्मी जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। उपद्रवियों ने इस दौरान एसपी पारिस देशमुख की गाड़ी को भी आग लगा दी थी। आनंदपाल की अंत्येष्टी के बाद मामला शान्त नजर आ रहा है। नागौर सहित चुरू और बीकानेर में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं। उधर गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि जनता को पुलिस का साथ देना चाहिए ना कि किसी अपराधी का।

परिजनों की सहमति से बिना शर्त हुआ अंतिम संस्कार
आनंदपाल की मौत के बीस दिन बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस और परिवार के साथ ग्रामीणों की मौजूदगी के बाद आनंदपाल को उसके मामा के बेटे ने शव को मुखाग्नि दी। आनंदपाल के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए बुधवार को राज्य मानवाधिकार आयोग ने परिवार सहित राज्य सरकार को नोटिस दिया और शव का 24 घंटों में निस्तारण करने के निर्देश दिए। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि अगर मृतक का परिवार उसका अंतिम संस्कार नही करे तो राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी करे। उधर बुधवार रात को श्रद्धांजली सभा के नाम पर भीड़ और पुलिस में हुई झड़प के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री राजे से सांवराद में हालात पर बात की। गृह मंत्री राजनाथ ने हालात से निपटने के लिए राज्य को फ्रीहैंड दिया। गुरूवार शाम करीब साढ़े छह बजे आनंदपाल का अंतिम संस्कार उसके परिजनों, जिसमें मामा अमर सिंह, काका शिव सिंह और ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया।
हथियार मालखाने में रख दें और घर चले जाएं: कटारिया
20 दिन बाद आनंदपाल का अंतिम संस्कार होने के बाद सूबे के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि जनता से मेरी अपील है कि उसे मुंह खोलना चाहिए। पुलिस ऐसे अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाए या फिर हथियार मालखाने में रख कर घर चली जाए। पुलिस की नैतिक जिम्मेदारियों से बचकर क्या हम अपराधियों और गुंडो को सर्वस्व सौंप दे। उन्होने कहा कि आनंदपाल जैसे अपराधियों को सजा देकर अगर पुलिस ने गलत किया तो जनता बताएं कि पुलिस को क्या करना चाहिए। उन्होने कहा कि आनंदपाल पर 34 मुकदमें दर्ज थे, जिसने पुलिसवालों को मार दिया, सरकार ने उसे पकड़ने के लिए आठ करोड़ रुपए खर्च कर दिए। एक अपराधी को मारने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाना चाहिए या फिर एक अपराधी की पक्ष में उपद्रव कर अपनों को ही नुकसान पहुंचाना चाहिए।

