धौलपुर उपचुनाव 2017: बसपा ने किया अफवाहों का खंडन, बोले अब की बार बनवाएंगे भाजपा की सरकार

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    लंबे समय से राजस्थान की सुर्ख़ियों में बने हुए धौलपुर उपचुनाव, निर्वाचन आयोग की कड़ी निगरानी के बीच कल दिनांक 9 अप्रैल, यानि कि रविवार को करा दिए जाएंगे। मतदान के परिणाम भी 13 अप्रैल तक घोषित कर दिए जाएंगे। इस बीच राजस्थान की दो बड़ी पार्टियों– कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने तरीके से वोटरों को रिझाने के लिए यथासंभव प्रयास किये। इस बीच किसी ने रोड शो निकाला तो किसी ने साम, दाम, दंड, भेद का प्रयोग करते हुए ‘जाति कार्ड’ को भुनाने का प्रयास किया। अफवाहों को बाजार भी गर्म रहा। सबने अपने तरीके से हार-जीत की अटकलें लगाई और मतदाताओं को गुमराह कर के फायदा उठाने का भी प्रयास किया।

    हाल ही में भगवान सिंह बाबा (जिला प्रभारी करौली) द्वारा धौलपुर निर्वाचन क्षेत्र में बसपा समर्थक मतदाताओं को गुमराह करने वाले एक प्रेस नोट से सनसनी फ़ैल गयी। उस खबर के बाद कोई बसपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बात कह रहा था तो कोई ये कह रहा था की बहुजन समाज पार्टी मतदाताओं के पास जा के कांग्रेस के लिए वोट मांग रही है। इससे पूर्व धौलपुर विधायक बी.एल. कुशवाह के समर्थकों में हलचल मच गयी। मतदाता ये समझ नहीं पा रहे थे कि भाभी शोभारानी (यानि की भाजपा) का साथ दें या फिर प्रेस नोट का अनुसरण करते हुए कांग्रेस-भाजपा गठबंधन का रुख लें।

    लंबे समय तक चलने वाले इस ड्रामे से ना केवल जनता परेशान थी अपितु नेता भी हैरान थे कि कांग्रेस ने बसपा के साथ ‘अंडर दी टेबल’ डील आखिर कर कब ली। काफी जद्दोजहद के बाद खुद बसपा जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल माथुर ने इन अफवाहों पर विराम लगाया। 7 अप्रैल को उनकी अध्यक्षता में हुई मीटिंग में ये साफ कर दिया गया कि कांग्रेस का बसपा से कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी शोभारानी के समर्थन में है। अपनी बात रखते हुए बसपा ने धौलपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ कोई प्रत्याशी भी नहीं उतारा है।

    और तो और उन्होंने ये दावा भी किया कि ये प्रेस नोट बसपा एवं कांग्रेस के कुछ स्वार्थी नेताओं द्वारा फैलाये गए जाल-बट्टे का हिस्सा है। उनकी इस घोषणा के बाद कांग्रेस द्वारा वोटरों को गुमराह करने का प्रयास फिर एक बार विफल हो गया। अब लगता है उनके पास सिवाय हाथ मलने के और कोई चारा नहीं है क्योंकि कुशवाह समाज के वोटर तो उनके हाथ से अब निकल ही चुके हैं। अब देखना ये है कि उनके समर्थक उनका कितना साथ देते हैं।