
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में प्रदेश हित में कई कार्य किए हैं। बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री राजे ने एक साथ कई फैसलों पर मुहर लगाकर विकास की गति को बढ़ाने का काम किया हैं। मुख्यमंत्री राजे ने इस बैठक में प्रदेश के होनहार और पदकवीर खिलाड़ियों को राज्य स्तर की सरकारी नौकरी देने, कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का नियमन, जनकल्याण शिविरों की समीक्षा, पट्टा वितरण अभियान की समीक्षा और प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था को सूधारने के लिए कई फैसले लिए।
कृषि भूमि पर नियमन का रास्ता हुआ साफ
राज्य सरकार ने राजस्थान में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन को लेकर एक अहम फैसला लिया है। इस फैसले से हजारों कॉलोनियों के नियमन का रास्ता साफ हो जाएगा। कैबिनेट की बैठक में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन की कट ऑफ डेट बढ़ा दी है। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण शिविर में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का नियमन के लिए पहले 1999 की कट ऑफ निर्धारित थी जिसे अब 2 मई, 2012 तक कर दिया गया है।
शहरी जनकल्याण शिविरों में 3088 पट्टों का हुआ वितरण
राठौड़ ने बताया कि शहरी जनकल्याण शिविरों में अब तक 3088 पट्टे जारी किए गए हैं। पट्टा वितरण के कार्य का फीडबैक लेते हुए मुख्यमंत्री राजे ने अधिकारियों को लताड लगाई और लोगों को राहत देने वाले इस अभियान की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में सामने आया कि नियमन की कट ऑफ डेट में बदलाव तथा कुछ अन्य रियायतें दी जानी चाहिए। इस पर कट ऑफ डेट बढ़ाने का निर्णय किया गया।
3245 ग्राम पंचायतों में 1 लाख 13 हजार 798 पट्टों को हुआ वितरण
राठौड़ ने बताया कि बैठक में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण पट्टा वितरण अभियान की समीक्षा की गई। अभियान के तहत 3245 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाकर अब तक 1 लाख 13 हजार 798 पट्टे जारी किए गए हैं तथा 1 लाख 59 हजार 678 पट्टे प्रक्रियाधीन हैं। राजस्थान पंचायती राज नियम-1996 के नियम 157(1) में संशोधन कर पुराने घरों को विनियमित कर पट्टे देने के लिए कटऑफ वर्ष 1996 से बढ़ाकर 31 दिसम्बर, 2016 की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी विस्तार के लिए भूमि सेट अपार्ट की जिला कलक्टर की शक्तियां उपखण्ड अधिकारी को प्रत्यायोजित की गई है।
राज्य को मिलेगी एक्सपर्ट डॉक्टर्स की सेवाएं
संसदीय कार्य मंत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज ऑफ फिजीशियन/सर्जन मुम्बई से अनुबंध किया है, जिसके तहत राज्य के चयनित चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों को विभिन्न विषयों में दो वर्षीय डिप्लोमा एवं तीन वर्षीय फैलोशिप पाठ्यक्रम करवा जा सकेंगे। इन संस्थानों में ऐसे 21 डिप्लोमा एवं 5 फैलोशिप पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों में कुल 266 सीटें होंगी, जिनमें से 50 प्रतिशत सेवारत चिकित्सकों एवं 50 गैर सेवारत चिकित्सकों के लिए होंगी। चयनित चिकित्सकों के अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके डिप्लोमा एवं फैलोशिप प्रमाणपत्र निदेशक के कार्यालय में तीन साल तक जमा रहेंगे। इन चिकित्सकों को तीन साल तक राजस्थान सरकार के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देना बाध्यकारी होगा।

