
राजस्थान में सरकारी स्कूलों के लिए शुरू की गई करीब 15 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जो आरक्षण व्यवस्था की भेंट चढ़ गई थी वह बहाल हो गई हैं। राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के लिए हाईकोर्ट से खुशखबरी आई हैं। हाईकोर्ट ने आदिवासी बहुल जिलों में शत प्रतिशत आरक्षण के कारण अक्टूबर से भर्ती पर लगा रखी थी। अब कोर्ट द्वारा इसे हटा लिया गया हैं। राजस्थान में अब 15 हजार शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार दोपहर को हाईकोर्ट ने भर्ती जारी रखने का आदेश दे दिया।
बेरोजगार खुशी से झूम उठे
इस फैसले के आते ही राजधानी समेत जोधपुर, सीकर, अजमेर आदि सभी जिलों के बेरोजगार झूम उठे। बता दें कि हाईकोर्ट ने आदिवासी बहुल जिलों में शत प्रतिशत आरक्षण के कारण अक्टूबर से भर्ती पर लगा रखी थी। राज्य सरकार ने आज हाईकोर्ट से रोक हटाने का आग्रह किया था। राज्य सरकार की ओर से केन्द्र सरकार के अतिरिक्त सालिस्टर जनरल नरसिम्हन और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने पैरवी की थी। जिसमें सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में लोग नौकरियों की बाट जोह रहे हैं, ऐसे में यदि 15 हजार शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ होता है जनता को राहत मिल जाएगी।
क्या था पूरा मामला।
शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित की जाने वाली पात्रता परीक्षा के अंकों में आरक्षण व्यवस्था के तहत दी जाने वाली छूट के चलते पहले नियुक्ति पर रोक लगाई गई और अब राजस्थान हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को ही रोक दिया था। बता दें कि राज्य सरकार ने 15,000 पदों की थर्ड ग्रेड टीचर्स तृतीय श्रेणी शिक्षक) भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। प्रदेशभर में लंबे समय से सरकारी शिक्षकों की भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं को कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर खुशी की लहर दौड़ पड़ी हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने थर्ड ग्रेड टीचर्स (लेवल एक और दो) भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह रोक न्यूनतम योग्यता में अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों को 5 फीसदी छूट देने के कारण लगाई थी।

