हरियाणा में खाप पंचायतें एक बार फिर दो फाड़ आंदोलन को तैयार, 55 कंपनियां अर्द्ध सैनिक बलों की तैनात

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    आरक्षण के लिए आंदोलन को लेकर खापें दोफाड़ हो गई हैं, इसे बावजूद जाट आंदोलन के लिए तैयार हैं। करीब 60 खापों ने आंदोलन में शमिल नहीं होने का एलान किया है तो करीब 43 खाप पंचायतें 29 जनवरी से आंदोलन के लिए तैयार हैं। ऐसे में जाट संगठनों में टकराव के हालात के बीच हरियाणा तनाव का माहौल है। दूसरी ओर, हालात को काबू में रखने के लिए सरकार कोई कोर कसर नहीं रखना चाहती है। प्रदेश में विभिन्न जगहों पर पुलिस के अलावा अर्द्ध सैनिक बलों की 55 कंपनियां तैनात कर दी गई है।

    चंडीगढ़ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक के बाद जहां करीब 18 खापों के प्रतिनिधियों ने 29 जनवरी के आंदोलन से दूर रहने का एलान किया, वहीं रोहतक में जमा 43 खापों के प्रतिनिधियों ने आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की घोषणा कर डाली।

    जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रधान यशपाल मलिक को निशाने पर लेते हुए संगवान ने कहा कि वह जाट समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। ऐेसे में आंदोलन में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। वह धरना स्थल पर जाकर युवाओं को समझाएंगे कि वह किसी का मोहरा न बनें।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने मांगें पूरी करने के लिए कुछ समय लिया है। अगर इन पर अमल नहीं होता है तो 26 फरवरी को जींद में होने वाली रैली में आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी।जाट महासभा के ओमप्रकाश मान ने कहा कि सरकार ने मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है और हमें कुछ इंतजार करना चाहिए।

    उधर, रोहतक के नांदल भवन में कई खापों के प्रतिनिधियों ने रविवार से शुरू हो रहे आंदोलन को समर्थन का एलान किया। सर्व हुड्डा खाप के प्रधान ओमप्रकाश हुड्डा ने कहा कि सभी जिलों में खाप प्रतिनिधि खुद धरने पर बैठेंगे। सरकार का समर्थन कर रहे जाट नेता समुदाय के हितैषी नहीं।

    सरकार से वार्ता करने वाले खाप पतिनिधियों को जाटों के हित से लेना देना नहीं : यशपाल

    दूसरी ओर, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रधान यशपाल मलिक का कहना है कि चंडीगढ़ में सरकार से वार्ता करने के लिए जमा हुए खाप प्रतिनिधियों का जाटों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। सांगवान गुट सरकार का पिट्ठू बन गया है और उसी की भाषा बोल रहा है। जाटों के हक को लेकर हर हाल में रविवार से शांतिपूर्वक धरना शुरू किया जाएगा। समुदाय किसी के बहकावे में आने वाला नहीं।

    पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों ने संभाला मोर्चा

    दूसरी ओर सरकार ने विभिन्न जिलों में पुलिस के साथ ही अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती शुरू कर दी है। पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मद्देनजर हरियाणा सरकार कोई खतरा उठाने को तैयार नहीं है। प्रशासन व पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। शुक्रवार को पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों ने विभिन्न स्थानों पर फ्लैग मार्च किया। यह क्रम शनिवार को भी जारी रहेगा। राज्य में अब तक अर्द्ध सैनिक बलों की 55 कपंनियां पहुंच चुकी हैं।

     

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