रिफाइनरी मुख्यमंत्री राजे की थी पहल, पूर्वमुख्यमंत्री ने बिना सोचे समझे किया था HPCL से समझौता: परनामी

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Ashok Parnami

पूर्व सीएम अशोक गहलोत के रिफाइनरी पर हुए नए एमओयू पर सवाल खड़े किए जाने के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी गहलोत को माकूल जवाब दिया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष परनामी ने कहा कि रिफाइनरी का फैसला गहलोत सरकार का नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार का था। तब ही सीएम वसुंधरा राजे राज्य में रिफाइनरी लाने की पहल कर चुकी थी।

                                    रिफाइनरी मुख्यमंत्री राजे की थी पहल

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने गहलोत को जवाब देते हुए कहा कि जब गहलोत सरकार ने रिफाइनरी के लिए एमओयू किया तो हमने विधानसभा में विरोध किया था। हमने कहा था कि यह एमओयू राजस्थान के हित में नहीं है। इसके माध्यम से आप प्रदेश पर कर्जे का बोझ डालने जा रहे हैं। इससे केवल एचपीसीएल को लाभ है राजस्थान को नहीं । हमारे विधायकों ने भी यह मामला उठाया था और तब वसुंधरा राजे ने भी इसका विरोध किया था । अब जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो प्रदेश में रिफाइनरी प्रदेश हित को ध्यान मे रखकर लगाई जाएगा ना कि एचपीसीएल या खुद के स्वार्थ को ध्यान में रखकर। परनामी ने कहा कि तीन सालों में हम रिफाइनरी लगाने के प्रयासों में सफल हुए है और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मेहनत से सभी के चेहरे प्रसन्नता से खिले है।

                           परनामी ने बताया गहलोत और राजे के एमओयू में अंतर

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष परनामी ने बताया कि गहलोत सरकार के समय हुए एमओयू में कांग्रेस 15 सालों में 56040 करोड़ रुपए सरकार के माध्यम से एचपीसीएल को देना तय हुआ था। लेकिन अब जो एमओयू हुआ है उसमें केवल 3726 करोड़ की जगह 1123 करोड़ रुपए हर वर्ष देंगे। यानी 15 सालों में 16845 करोड़ रुपए। इस प्रकार करीब 40 हजार करोड़ रुपए का फायदा राजस्थान को हुआ है। परनामी ने कहा कि यदि कांग्रेस के एमओयू पर रिफाइनरी लगती तो 56 हजार करोड़ रुपए लगते। लेकिन इस एमओयू से केवल 16845 करोड़ रुपए राजस्थान सरकार के लग रहे हैं।

                                      गहलोत को कुछ ऐसे दिया परनामी ने जवाब

पूर्वमुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि गहलोत साहब ने रिफाइनरी को तीन साल बाद लगाए जाने को लेकर सवाल खड़े किए है, लेकिन कि इस नए एमओयू में जो डवलपमेंट हुआ, उसमें जो नई चीजें सामने आई, उनको इसमें ध्यान में रखा गया है। भाजपा सरकार ने आगे आने वाले सालों को सोच कर रिफाइनरी जैसा बड़ा कदम उठाया है। यदि कीमत बढ़ भी गई तो राज्य सरकार को क्या नुकसान हुआ। कांग्रेस ने एचपीसीएल को इंटरेस्ट फ्री लोन देने का काम किया था। यदि कांग्रेस की सरकार 56 हजार करोड़ रुपए का कंपाउंड इंटरेस्ट लगाएं तो 15 साल का ब्याज 1594200 रुपए ब्याज बनता है। ऐसे में ब्याज का भी 1 लाख 11 हजार रुपए का फायदा राज्य सरकार को हो रहा है।

अभी एमओयू के अनुसार कुल लाभ 1.42 लाख रुपए का फायदा होगा।