‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ हैं राजे सरकार का सिद्धांत, राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विधेयक 2017 हुआ पारित

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    Vasundhara Raje Schemes

    मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रदेश की 36 कौमों को साथ लेकर चलने के अपने वादे को निभा रही हैं। सोमवार को राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विधेयक 2017 ध्वनिमत से पारित कर दिया।

    14 वीं राजस्थान विधानसभा के 8वें सत्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विधेयक 2017 सदन में रखा। उन्होंने विधेयक उद्देश्यों और कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्द्रा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसरण में राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था।

    पिछड़ा वर्ग आयोग को मिलेगा कानूनी शक्ति

    राजस्थान हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग के लिए एक स्थाई आयोग नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों की पालना में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को कानूनी शक्ति प्रदान करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। मंत्री चतुर्वेदी ने सदन को बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिले। राज्य सरकार ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त पर काम कर रही है और सभी वर्गों के विकास का ध्यान रख रही है।

    इस प्रकार मिलेगा छात्रों को लाभ

    मंत्री चतुर्वेदी ने सदन को बताया कि राज्य के 750 छात्रावासों में आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 15 प्रतिशत स्थान आरक्षित हैं। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत फीस का पुनर्भरण करती है। अनुप्रति और पालनहार योजनाओं में भी इन वर्गों का ध्यान रखा गया है। 2008 में अध्यादेश लाए जाने के बाद आयोग की चार बैठकें हो चुकी हैं। इसके अलावा अन्य विषयों पर भी आयोग अपना काम कर रहा है।