खुशहाली और उल्लास का प्रतीक है बैसाखी: मुख्यमंत्री

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आज बैसाखी का शुभ पर्व है। सिखों का प्रमुख त्योहार बैसाखी आज प्रदेशभर में खुशी और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने प्रदेशवासियों को वैशाखी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। अपने शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री राजे ने कहा, ‘बैसाखी खुशहाली, समृद्धि और उल्लास का पर्व है। Baisakhi

इसी दिन गुरू गोविन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की नींव रखी और लोगों को नेकी के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।’ मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से गुरू गोविन्द सिंह जी की शिक्षाएं आत्मसात कर प्रदेश को समृद्ध एवं खुशहाल बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।

बैसाखी के इस मौके पर प्रदेशभर के गुरूद्वारों को सजाया गया है। शाम होने से पहले इन्हें रंगीली रोशनी से नहला दिया जाएगा। शाम को भांगड़ा और गिद्दा किया जाएगा। साथ ही शाम को आग जलाकर नई फसलों की खुशी मनाई जाएगी।  श्रद्धालु इस दिन कारसेवा भी करते है। दिनभर खालसा पंथ के संस्थापक गुरू गोबिंद सिंह जी और पंज प्यारों के सम्मान में कीर्तन होते हुए देखा जा सकता है।

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फसल पकने से हे बैसाखी का संबंध Baisakhi

बैसाखी को मेष संक्रांति भी कहते हैं क्योंकि इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। यह त्योहार खास तौर से खेती से जुड़ा हुआ है क्योंकि बैसाखी का संबंध फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। मान्यता है, बैसाखी के बाद ही गेहूं की फसल की कटाई शुरू होती है और इसके बाद से नए साल की शुरूआत होती है। यूं तो बैसाखी का पर्व देशभर में मनाया जाता है लेकिन यह त्योहार खास तौर पर पंजाब के साथ-साथ पूरे उत्‍तर भारत में मनाया जाता है।

इस साल बैसाखी पर बन रहा है शुभ संयोग Baisakhi

जैसाकि पहले बताया गया है, इस त्योहार का सिखों के लिए खास महत्व है। लेकिन इस वर्ष इसका महत्व अधिक बढ़ जाता है। वजह है, इस साल बैसाखी का शुभ संयोग बन रहा है। इस साल बैसाख का महीना 60 दिनों का होगा। पहला महीना 30 मार्च से शुरू हो चुका है जो 28 अप्रैल तक चलेगा। वहीं दूसरा महीना 29 अप्रैल से 28 मई तक चलेगा। इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है, इस दिन पापमोचनी गंगा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान दक्षिणा करने का भी खास महत्व बताया गया है।

विभिन्न राज्यों में अलग—अलग नाम

पंजाब और हरियाणा में वैसाखी को बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसके महत्व की तुलना दीपावली से की जाती है। इस त्योहर की तैयारी लोग कई दिन पहले से ही शुरू कर देते हैं। बैसाखी का यह खूबसूरत पर्व अलग अलग राज्‍यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। केरल में यह त्योहार ‘विशु’ कहलाता है। वैसाखी को बंगाल में नब बर्षा, असम में रोंगाली बीहू, तमिलनाडु में पुथंडू और बिहार में वैषाख के नाम से जाना जाता है।