
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे अपने पिछले कार्यकाल में कृषि विशेषज्ञों के एक के साथ इजराइल गई थी। वहां उन्होंने जैतून की खेती होती देख वहां से यह पौधा राजस्थान ले आईं और वहां से लौटने के बाद राजे ने प्रदेश में जैतून की खेती करने का निर्णय लिया। 20 मार्च, 2008 को बस्सी के ढिंढोल फार्म पर जैतून के प्रथम पौधे का रोपण किया गया। यह प्रयोग सफल हुआ और राज्य में जैतून लहलहाने लगा। इसी जैतून की फसल से राजस्थान में आॅलिव टी का निर्माण भी किया गया। अब यही आॅलिव टी की तकनीक राजस्थान से इजराइल सीखेगा। यह बात कंफर्म की है इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने की है। नेतन्याहू ने हाल ही में भारत की 4 दिवसीय दौरे पर यह बात कही। असल में नेतन्याहू भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भेंट करने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। यहां उनके स्वागत में आॅलिव टी परोसी गई। आॅलिव टी पीने के बाद नेतन्याहू को आॅलिव टी इतनी पसंद आई कि उन्होंने आॅलिव टी बनाने की तकनीक राजस्थान से सीखने की बात कही। इतना ही नहीं, इजरायली प्रधानमंत्री ने न केवल आॅलिव टी की प्रशंसा की अपितु जैतून उत्पादन और चाय प्रसंस्करण के बारे में जानकारी ली। Olive Tea
इस पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हुए राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा है कि ‘देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत राजस्थान में बनी आॅलिव टी से करना हमारे लिए गौरव की बात है। हमें गर्व कि जिस इजरायल से हम जैतून का प्लांटिंग मैटेरियल लाए थे। वहां के प्रधानमंत्री हमसे आॅलिव टी बनाने की तकनीक सीखने के लिए कह रहे हैं।’ Olive Tea
राजस्थान ने सबसे पहले बनाई आॅलिव टी Oli
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राजस्थान की सरजमीं को विश्व में सबसे पहले जैतून से बनी चाय बनाने का गौरव हासिल है। जैतून को 12 प्रकार के कैंसर सहित एचआईवी जैसे रोगों से लड़ने में कारगर माना है। यह चाय यह एंटी ऑक्सिडेंट और एंटीडायबिटीक होने के साथ ही हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करती है। कई महीनों तक चले इस शोध में सामने आया कि जैतून की पत्तियों से चाय बनाई जा सकती है। जैतूून चाय बनाने के लिए ओलिटिया फूड्स कंपनी ने सरकार के साथ एमओयू किया। कंपनी ने जयपुर जिले के बस्सी में जैतून पत्तियों की चाय का संयत्र स्थापित कर विश्व की पहली प्रसंस्कृत चाय का उत्पादन शुरू किया है।
मुख्यमंत्री राजे के पिछले कार्यकाल में शुरू हुई थी जैतून की खेती Olive Tea
आपको बता दें कि प्रदेश में जैतून की खेती की शुरूआत भाजपा के पिछले कार्यकाल में तब हुई थी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में कृषि विशेषज्ञों का एक दल इजरायल गया था। वहां से लौटने के बाद राजे ने प्रदेश में जैतून की खेती करने का निर्णय लिया। 20 मार्च, 2008 को बस्सी के ढिंढोल फार्म पर जैतून के प्रथम पौधे का रोपण किया गया और उसके बाद राज्य के 7 कृषि जलवायु खंडों में इसका प्रायोगिक रोपण किया गया। यह प्रयोग सफल हुआ और राज्य में जैतून लहलहाने लगा। राज्य में जैतून अरबेक्विना, बरनियर, फ्रंटोयो, कोर्टिना, कोलोनाइकी, पासोलिन, पिकुअल किस्मों का पौधारोपण किया गया था। रोचक बात है कि जैतून राज्य की परम्परागत फसल नहीं होने के बावजूद भी इसका उत्पादन और प्रसंस्करण राजस्थान में सफलतापूर्वक होने लगा है। Olive Tea
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में सहायक आॅलिव टी Olive Tea
कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने बताया कि विद्यासागर विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में जैतून को 12 प्रकार के कैंसर सहित एचआईवी जैसे रोगों से लड़ने में कारगर माना है। शोध में पता चला है कि राज्य में उत्पादित जैतून में ट्राइटरपेनिक एसिड़ मिला है। इस एसिड का उपयोग कैंसर प्रतिरोधी दवा बनाने में होता है। 100 ग्राम जैतून फल में 60 मिलीग्राम तक यह तत्व पाया गया है। इसके साथ ही इसकी चाय भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का काम करेगी। Olive Tea

