आनंदपाल की मौत पर समाज के ठेकेदारों ने महज़ राजनीति की, यह राजपूत का धर्म नहीं

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    राजस्थान सहित आस-पास के पांच राज्यों में दहशत का नाम बन चुके गैंगस्टर आनंदपाल सिंह की जीवन कहानी तो कब की ख़त्म हो चुकी है। लेकिन समाज के उन लोगों की कहानी और बिसात अभी ज़िंदा है, जिन्हौने एक आम नौजवान को खूंखार गैंगस्टर बनाया था। आनंदपाल के मरने के बाद भी उसकी मृत देह को अपनी राजनीति की झालर से सजाने वाले इन लोगों की मानवता तो उसी दिन की ख़त्म हो चुकी थी जब इन्होने आनंदपाल को अमानव बनाया था। राजस्थान के नागौर ज़िलें के रहने वाले आनंदपाल सिंह को उसकी मौत के बाद भी तड़पाया गया। समाज के हिमायती बनने का ढोंग करने वाले कुछ लोगों ने आनंदपाल के मृत शरीर की आड़ में अपनी सुर्खियां बड़ाई। आनंदपाल का इस्तेमाल कर अपनी साख़ में बढ़ोतरी करने का काम इन समाज के ठेकेदारों ने किया। जहाँ तक मेरी समझ है, यह राजपूत धर्म नहीं है।

    आनंदपाल का राजनैतिक इस्तेमाल हुआ महज़:

    आनंदपाल सिंह को शय देकर अपराध की दुनियां में खड़ा करने वाले नेता लोगों ने ताउम्र आनंदपाल का इस्तेमाल किया। समाज हितैषी बनने का नाटक करते हुए गाँव के पढ़े-लिखें नवयुवक को झांसे में लिया। दुनिया की नज़र में आनंदपाल को बदनाम अपराधी बताकर उसके साँए में अपराध करने वाले लोगों ने आनदपाल की मौत को भी मनहूस तमाशा बनाकर रख दिया। मुझे पूरा यकीन है कि दुनिया की कोई माँ, कोई पत्नी, कोई बेटियां यह नहीं चाहती कि उनका बेटा, पति या पिता अपने मोक्ष के लिए भी तड़पता रहे। आनंदपाल के दाह संस्कार को 20 दिन तक रोके रखने की बात उसकी माँ, पत्नी और बेटी के मन में तो आई भी नहीं होगी। इस परिवार को बहकाकर जाति और इलाके के नेता लोगों ने राजपूत समाज के कर्ता-धर्ता होने का स्वांग रचा था।

    देश के शहीदों को बनाये अपनी प्रेरणा:

    पूरे भारत देश में अगर बलिदान और प्राणोत्सर्ग करने वालों का कोई धाम है तो वह राजस्थान है। एक कवि ने यहाँ के बलिदान की गौरवगाथा में बताया है कि ”राजस्थान की पवित्र धरती पर पैर रखते हुए भी मै कांपने लगता हूँ। मुझे डर लगता है कि कहीं मेरा पैर किसी बलिदानी की रक्तरंजित माटी पर न रख गया हो।” ऐसा राजस्थान जो जाना जाता है, महाराणा सांगा और प्रताप के लिए, जो जाना जाता है गोरा और बादल के लिए वहां जब आज का युवा कई बेगुनाहों को मार कर उनके बच्चों को अनाथ और बीवी को बेसहारा बनाने वाले आनंदपाल को पूजता है, उसका गुणगान करता है तो बड़ा दुःख होता है। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान करने वाले परमवीर मेजर शैतान सिंह और पीरू सिंह भी इसी माटी के लाल हुए है। ये लोग भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए। यदि ये नौजवान देशहित सर्वस्व अर्पण करने वाले इन लोगों को अपनी प्रेरणा बनाये, इनका महिमामंडन करें तो यह मेरी धरती के स्वाभिमान को बढ़ाएगा।

    सोचकर देखिये, देश बड़ा या समाज:

    रावणा राजपूत समाज से नाता रखने वाला आनंदपाल सिंह आज इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसके नाम पर खेली जा रही राजनीति बढ़ती ही जा रही है। 6 लोगों की हत्या का दोषी आनंदपाल अपराधी था। अपराधी का अंत उसी तरह हुआ, जैसा होता है।

    यकीन मानिये किसी जाति, समाज या समुदाय से बड़ा देश होता है। महज किसी दबंग समाज के नेता की गुलामी में अपने देश के संविधान की धज्जियाँ उड़ाना कहाँ तक ठीक है? राजपूत तो हमेशा मातृभूमि के लिए जान देने वालों में आगे रहे है, फिर यहीं लोग आज चंद सुर्ख़ियों और पहचान बनाने के लिए अपने देश के दुश्मन क्यों बनने लगे? सबसे ज़्यादा गलती समाज के उन ठेकेदारों की है जो अपनी विचारधारा के आगे देश के क़ानून और संविधान को बेइज़्ज़त करते है। सोचकर देखिये एक बार, जाति और समाज के नाम पर देश तोड़ने वाले ये लोग आख़िर हमें कहाँ ले जायेंगे?