अब खट्टे फलों में राजस्थान बनेगा देश का नंबर वन प्रदेश, कोटा में तैयार हो रही हैं नींबू वंशीय फलों की 24 किस्में तैयार

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    vasundhara raje

    राजस्थान कृषि तकनीकों में देश का सबसे अग्रणी राज्य बनता जा रहा हैं। प्रदेश में कम पानी में होने वाली कृषि विस्तार से की जाने लगी हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश के किसान भाईयों को कई योजनाओं द्वारा संबल प्रदान किया हैं। मुख्यमंत्री राजे का लक्ष्य आगामी 2020 तक प्रदेश के अन्नदाता की आमदनी को दोगूनी करने का हैं। ग्राम जैसे कार्यकर्मों से किसानों को खेती की नई तकनीकों और विधियों का ज्ञान हुआ हैं अब हमारा किसान पारंपरागत खेती को ही आधुनिक तरिकों से करके अधिक मुनाफा कमा रहा है। राजस्थान एक सूखा प्रदेश हैं जहा इजराइल जैसे शुष्क प्रदेश की तर्ज पर किसान भाई खेती कर रहे हैं। ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट इस बार कोटा में होने जा रहा है लेकिन कोटा जैसा क्षेत्र पहले से ही कृषि की नई तकनीको अपना कर विकास के पथ पर अग्रसर हो चुका हैं। राजस्थान का कोटा नींबू वंशीय फलों का सबसे बड़ा उत्पादक हैं यहां क्षारिय फलों की 24 किस्मों का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जा रहा हैं।

    Citrus Fruits

    24 किस्मों के सिट्रस फलों को किया जाता हैं तैयार

    कोटा के निकट नान्ता में स्थित सिट्रस फ्रूट्स( नींबू वंशीय फल) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सिट्रस फलों की 24 किस्में तैयार की जा रही हैं। वर्ष 2014-15 में विधिवत रूप से प्रगति में आई यह परियोजना सिट्रस फलों की पौध तैयार करने एवं बागबानी प्रबंधन में तेजी से अत्याधुनिक केंद्र बन चुका है। 6.8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस सेंटर का प्राथमिक उद्देश्य सिट्रस फलों की पौध तैयार करना है। यहां विकसित की जा रही पौध की विविध किस्मों में क्लेमेंटाइन, मिशेल डेजी, किन्नू, नागपुर मंडरिन, नागपुर सीडलैस, जफ्फा एवं अन्य शामिल हैं।

    इजराइली तकनीक से हो रहे हैं 50 हज़ार पौधें तैयार

    इन फलों को तैयार करने के लिए प्लांट डवलपमेंट एवं बागबानी प्रबंधन इजराइली तकनीक पर किया जा रहा है, जैसे कि सिंचाई के लिए मल्च, ड्रिप व रिज बेड सिस्टम। बहुत ही कम समय में इस सेंटर द्वारा प्रतिवर्ष 50,000 पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस सेंटर द्वारा रोगमुक्त व उच्च गुणवत्ता वाली पौध के उत्पादन का लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिया गया है। यहां ग्लोबल मार्केट में निर्यात के लिए उपयुक्त सिट्रस फलों की नई किस्में बनाने का कार्य भी किया जा रहा है। केंद्र का लक्ष्य बागवानी कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देना भी है। इंटेंसिव हॉर्टिकल्चर तकनीकें विकसित करना, पोस्ट हार्वेस्ट व वैल्यू एडिषन टेक्नोलॉजीज तथा फर्टिगेशन व इरिगेषन मैनैजमेंट तकनीकों के बारे में जागरूकता लाना इसके दीर्घकालिक लक्ष्य हैं।

    Citrus Fruits

    सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित सिट्रस फलों की किस्में

    क्लेमेंटाइन, डेज़ी, किन्नो, नागपुर मंडरिन, नागपुर सीडलैस, जफ्फा, वाशिंगटन नावेल, ब्लड रेड्ज, काटोल गोल्ड, पाइनेपल, फेयर चाइल्ड, मर्कट, न्यूहाल नावेल, फ्रेमोंट, वेलेंसिया ओलिंडा तथा न्यू सेलर। विक्रम, प्रामलिनी, बालाजी, एनआरसी एसिड लाइम-7, एनआरसी एसिड लाइम-8 और साई शरबती एसिड लाइम की किस्में हैं।

    ग्राम-कोटा में सिट्रस फ्रूट के बारे में मिलेगी विस्तार से जानकारी

    इस महीने के अंत में कोटा में आयोजित किए जाने वाले ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) में इस सेंटर द्वारा इस क्षेत्र की सिट्रस फ्रूट इंडस्ट्री को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बारे में बताया जाएगा। इसके अतिरिक्त ‘ग्राम‘ में निवेषकों द्वारा पोस्ट हार्वेस्ट प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स की संभावना को भी तलाशा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में प्राथमिक नर्सरी (प्लांट ग्राफ्टिंग), द्वितीय नर्सरी (बडिंग), प्रोटेक्टेड मदर ब्लॉक (मदर प्लांट्स के पोषण), ओपन मदर ब्लॉक (ग्रीन हाउस के बाहर स्थित मदर प्लांट्स) और रूट स्टॉक एवं इंटर स्पेस के दो डेमोंस्ट्रेषन की सुविधा उपलब्ध है।