
आज पोकरण में की गई परमाणु परीक्षण की 20वीं वर्षगांठ है। आज से ठीक 20 साल पहले यानि 11 मई, 1998 के दिन मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अगुआई में जैसलमेर के पोकरण कस्बे में पहला सफल परमाणु परीक्षण किया गया। इसी परीक्षण के साथ भारत विश्व की परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हो गया था। Pokhran Test
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायपेयी के अटल इरादों का ही नतीजा है कि भारत आज परमाणु विश्वशक्तियों में शुमार है। भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया था। लेकिन इस परीक्षण के बाद अटल बिहारी वायपेयी वाजपेयी ने जय विज्ञान जोड़कर इस नारे को नया क्षितिज दिया। Pokhran Test

इस मिशन कुछ इस तरह से अंजाम दिया गया कि आधुनिक सूचना और खुफिया तंत्र में अपने को सर्वश्रेष्ठ होने का दावा करने वाले अमेरिका समेत सभी विकसित पश्चिमी राष्ट्रों को भारत की परमाणु परीक्षण योजना की कानोकान भनक तक नहीं लगी। राजस्थान के पोकरण में 11 व 13 मई को अचानक किए गए कुल 5 सफल परमाणु परीक्षणों से अमेरिका, रूस व पाकिस्तान समेत सभी देश दंग रह गए। Pokhran Test
Read More: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 14 मई को पुष्कर में करेंगे पूजा अर्चना

इस प्रॉजेक्ट के साथ जुड़े वैज्ञानिक कुछ इस कदर सतर्कता बरत रहे थे कि वे एक दूसरे से भी कोड भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को छद्म नामों से बुलाते थे। ये झूठे नाम इतने हो गए थे कि कभी-कभी तो साथी वैज्ञानिक एक दूसरे का नाम भूल जाते थे। उस दिन सभी को आर्मी की वर्दी में परीक्षण स्थल पर ले जाया गया था ताकि खुफिया एजेंसी को यह लगे कि सेना के जवान ड्यूटी दे रहे हैं। ‘मिसाइलमैन’ अब्दुल कलाम खुद वहां सेना की वर्दी में मौजूद थे। Pokhran Test

मिशन को इतना सीक्रेट रखा गया था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को तक अंतिम समय पर रखा गया था। परमाणु बम को भाभा आणविक शोध केंद् से मुंबई हवाई अड्डे तक, यहां से जैसलमेर और फिर पोखरण तक पहुंचाने जैसा कठिन कार्य को एक सोची—समझी योजना के तहत अंजाम दिया गया था। परीक्षण के समय तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन भी यहां उपस्थित थे। Pokhran Test

