
राजस्थान सराकर प्रदेश में भ्रूण हत्या व लिंग जांच करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त हो गई हैं। नतीजतन पिछले तीन साल में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बेटियों को मौत के घाट उतारने वाले 125 ड़ॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया इसके साथ ही विभाग ने 21 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन भी निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री राजे के निर्देशानुशान बेटियों को बचाने की विभिन्न योजनाओं का परिणाम हैं।
प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने बुधवार को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बाल लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार बाल लिंगानुपात 888 बालिकाएं प्रति एक हजार बालक था, जो हर वर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 की जनगणना में बाल लिंगानुपात 930 से 935 के बीच रहने की उम्मीद है।

145 मुकदमे, 202 लोग, 125 डॉक्टर हुए गिरफ्तार
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में पीसीपीडीएनटी एक्ट के तहत अब तक प्रदेश में 145 मुकदमें दर्ज कर 202 व्यक्तियों को पकड़ा गया है। इनमें 125 चिकित्सक हैं और 77 दलाल व अन्य व्यक्ति हैं। उन्होंने बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे अन्य नवाचारों की भी जानकारी दी।
2012 के 904 से 2016 में 939 तक पहुंचा लिंगानुपात
सराफ प्रश्नकाल के दौरान विधायकों की ओर से पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि हर साल होने वाले 14 लाख से अधिक जन्म के रिकॉर्ड के आधार पर वर्ष 2012 में 7.52 लाख लड़के और 6.80 लाख लड़कियां थीं और बाल लिंगानुपात 904 था। वर्ष 2013 में 7.65 लाख लड़कों, 7.03 लाख लड़कियों के साथ बाल लिंगानुपात 920 था। वर्ष 2014 में 7.27 लाख लड़कों और 6.82 लाख लड़कियों के साथ बाल लिंगानुपात 927 था। इसी तरह वर्ष 2015 में 7.31 लाख लड़कों और 6.80 लाख लड़कियों का जन्म हुआ और बाल लिंगानुपात 930 रहा। वर्ष 2016 में 7.40 लाख लड़कों और 6.86 लाख लड़कियों के जन्म के आधार पर लिंगानुपात 939 रहा है।

