आनंदपाल पर सियासी तांड़व करने वाले जला रहे है राजस्थान, अपने बच्चों को आनंदपाल बनने से रोके मां-बाप

    0
    2214
    burning-bus

    राजस्थान के खूंखार अपराधी आनंदपाल की मौत पर सियासत का तांडव करने वालों शह पर राजस्थान चल रहा है। मृतक आनंदपाल के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ लोगों ने पूरे राजस्थान में बवाल मचाया हुआ है। बुधवार को राजपूत समाज ने आनंदपाल के गांव सांवराद में श्रद्धांजली सभा के आयोजन के नाम पर कुछ स्थानीय नेता अपनी राजनीति की रोटियां सेकने में लगे हुए है। श्रद्धांजली सभा में जमा भीड़ को नेताओं के भाषणों ने उग्र किया और पुलिस के 25 जवानों से मारपीट की। उपद्रवी भीड़ ने करीब नौ  बजे सांवराद रेलवे स्टेशन की पटरिया उखाड़ दी, पुलिस अधीक्षक पारिश देशमुख की गाड़ी को आग लगा दी, भीड़ ने जवानों की एके 47 राइफलें छीन फायरिंग की। हालात बेकाबू हो गए, शांति व्यवस्था को ताक पर रख आनंदपाल के परिजनों और उसके नाम पर बवाल करने वालों ने इस तरह से अपने बेटे को श्रद्धांजली दी है। घायल पुलिसकर्मियों को जयपुर भर्ती किया गया है और पुलिस ने एतिहात के तौर पर सांवराद में कर्फ्यु लगाया है। उधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि मृतक के शरीर का निस्तारण आगामी 24 घंटों में करें। मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को निर्देश दिए है कि आनंदपाल के शव का 24 घंटों में अंतिम संस्कार करना सरकार की जिम्मेदारी है उसे पूरा करें।

    policeman

    आज वाकई में राजस्थान जल रहा है

    कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया में मोबाइल की वॉयस रिकॉर्डिंग वायरल हो रही थी जिनमें एक शख्स दूसरे व्यक्ति से कह रहा था कि राजस्थान जल रहा है इसका फायदा उठा लो, वाकई में कुछ लोगों ने राजस्थान को जलाने में कोई कोर-कसर नही छोड़ी। एक अपराधी, गैंगस्टर और हत्यारें को मौत के बाद दूसरें लोगों की जान पर खेल कर क्या उसे श्रद्धांजली दी जा सकती है। वाकई में आनंदपालको श्रद्धांजली देने आये लोग उसके फॉलोअर थे जो मारकाट-हिंसा करने के लिए ही सांवराद में इकट्ठे हुए थे। श्रद्धांजली सभा के नाम पर मातम मनाने आई भीड़ को नेताओं ने अपने कड़वे भाषणों से उग्र बनाया और पुलिस के जवानों को पीटने के साथ ही गांवों में हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया।

    एक शव का अंतिम संस्कार करने की बजाय उस पर सियासत कर रहे है कुछ लोग

    अपराधियों की शह पर राजनीति करने वालों को जनता का दुख-दर्द कब समझ में आता है। कुछ नेता तो इसे अपना भाई तो कुछ बेटा बुलाने वाले लोगों को आनंदपाल जिंदा क्यों नही दिखाई दिया। आनंदपाल तो चला गया लेकिन मरने के बाद भी उसने लाखों लोगों की बददुआएं अपने सिर ली है। उपद्रवी भीड़ ने यातायात जाम कर दिया, ट्रेने नही आ जा सकी, बसों में आग लगाई। आखिर क्यों एक मृतात्मा की अन्तेष्टी करने की बजाय उसके नाम पर प्रदेश के लोगों पर अत्याचार क्यों हो रहा है। राजनेताओं ने सांवराद में आकर अपनी आगे आने वाले चुनाव की टिकट तो पक्की कर ली लेकिन इस तरह से अगर कोई नेता बनता है तो कैसे जनसेवक के रूप में काम करेगा जो लोगों की लाशों पर चला हो।

    bus

    24 घंटों में राज्य सरकार को अंत्येष्टी करने के निर्देश

    आनंदपाल की मौत पर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने संज्ञान तेले हुए मृतक का अंतिम संस्कार 24 घंटों के भीतर करने के निर्देश दिए है। एक शव को लेकर बेठे लोगों को यह पता होते हुए भी उसका संस्कार नही कर रहे कि उससे हजारों लोगों में संक्रमण फैल सकता है। लोग मर सकते है। कोई बाप, मां, बेटी और पत्नी इतनी क्रूर कैसे हो सकती है। आखिर आनंदपाल के नाम पर राजस्थान को जलाने वालों के लिए भी कोई सजा है या नही। आनंदपाल ने अपने जीवित रहते जितने अपराध किए थे उतने शायद कल जमा भीड़ ने भी कर दिए तो क्या इसकी कोई कीमत नही है। आज एक आनंदपाल ने राजस्थान की शांति में आतंक फैला दिया है कल को अगर दो-चार आनंदपाल पैदा हो गए तो राजस्थान की भस्म कों बंटोरने वाला कोई नही रहेगा।

    एक अपील- अपने बेटों को आनंदपाल बनने से रोकें माता-पिता

    आनंदपाल के नाम राजनीति करने वाले करें लेकिन प्रदेश के युवाओं और माता-पिताओं से अपील है कि अपने पुत्रों को भविष्य गर्त में नही झोंके। आनंदपाल मर गया लेकिन इन युवाओं को, अपने बेटों को राजस्थान का दूसरा आनंदपाल बनने से रोकें। माता-पिता अपने बच्चों को समझाएं की अपराधियों की कोई जात-पात नही होती, क्राइम करने वालों की समाज में कोई जगह नही होती। आज आनंदपाल मारा गया है कल कोई और अपराधी मारा जाएगा। अपने बेटों को आनंदपाल बनने से रोकें नही तो हो सकता है कि एक दिन आपके बेटे पर भी ऐसी सियासत होगी।